My experiences and encounters in my quest for openness and honest abstraction.

तकनीकी ज्ञान से दूरी

सॉफ्टवेयर बनवाते बनवाते मैं महसूस कर रहा हूँ कि मैं मैनेजर ज्यादा ही हो गया हूँ! ग्राहकों के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट करते करते हाथ से काम करने का सुख दूर होता जा रहा है! मैं देख रहा हूँ कि मेरे टेक्निकल टार्गेट्स में नए आइटम जुड़ते जा रहे हैं परन्तु पुराने आइटम वहीँ के वहीँ हैं. लिस्ट कुछ इस प्रकार है:

Single Page Web Applications using JavaScript
Mindful Time Management - Pomodoro
Git
Code Reviews using Phabricator and associated Tools
Animation - HTML5 Canvas
SVG
WebGL
node.js
Apache and Ngnix
BDD - perhaps Behat
Unit Testing
PHP Documentor and Doxygen

थकान में किया गया काम

बहुत बार मुझे लगा है कि थकान में किया गया काम गलतियों की वजह से दोबारा करना पड़ता है या फिर उसकी क्वालिटी कम होती है| पिछले दिनों के मेरे अनुभव ने ऐसा ही कुछ मुझे फिर से सिखाया.

कहानी ये है कि मैंने स्वयं एक डेडलाइन बनाई थी कि मैं अपने सारे websites नए और सस्ते सर्वर पर migrate कर लूँगा| इस काम के लिए हमने 17 फरवरी की डेडलाइन बनायीं थी - चूंकि हमारा सर्वर 17 फरवरी को renew होता है, इसलिए 14 फरवरी एक reasonable डेट लग रही थी| लेकिन 14 फरवरी तक काम पूरा नहीं हो पाया था| अब मैंने सोचा कि इससे पहले कि पुरानी होस्टिंग वाला अकाउंट से पैसे काट ले, मैं क्रेडिट कार्ड इनफार्मेशन change कर देता हूँ|

भारतीय स्टूडेंट्स के लिए प्रोग्रामिंग सीखने का प्लेटफार्म

बहुत दिनों से बिखरा बिखरा महसूस होता है - क्योंकि सारी लाइफ इंटरप्ट मोड में चली है अब तक - किसी ने कोई डिमांड की - पूरी करने में लग जाओ| एक हद तक तो ये ठीक है परन्तु जब एक लम्बे अंतराल तक सिर्फ इंटरप्ट मोड में काम करते जाओ तो फिर लगता है कि वो करो जो करना चाहते हो|

मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक - अभी जो करना चाहता हूँ वो एप्लीकेशन डेवलपमेंट और शिक्षा से ही सम्बंधित है| एक कच्चा सा प्लान इस प्रकार है -

1. हिंग्लिश में आठ मिनट तक के टेक्निकल विडियो;
2. विडियो रोक कर प्रश्न पूछने और उत्तर देने की सुविधा;

नदिया के पार - और दूसरी फैवरेट फ़िल्में

उस दिन तीसरी बार नदिया के पार देखी - पिछली दोनों बारों की तरह इस बार भी इसकी खूबसूरती और सरलता ने विभोर कर दिया. लिखूंगा - बाद में - अभी तो विभोर हो लूं - हम आपके हैं कौन seems to be a gaudy imitation only.

सोचता हूँ फैवरेट फिल्मों की एक लिस्ट बनों - देखूं कौन कौन सी याद आती हैं जब सोचूं तो:

- शूल
- नदिया के पार
- दो बीघा ज़मीन
- दो ऑंखें बारह हाथ
- लिंकन
- द लास्ट समुराई
- इंग्लिश-विंग्लिश
- ट्विस्टर
- फोरेस्ट गंप
- कांटेक्ट
- जाने भी दो यारो
- आशीर्वाद
- पॉइंट ब्रेक

Ubuntu पर खालिस कमांड लाइन

अपने आप को कमांड-लाइन की आदत डालने के लिए मैंने सोचा कि क्यों न GUI को बिलकुल हटा ही दिया जाए. ऐसा करने के लिए मैंने पहले /etc/default/grub फ़ाइल की निम्नलिखित लाइन को कमेंट आउट किया:
GRUB_CMDLINE_LINUX_DEFAULT="quiet splash"
और ये लाइन कमेंटेड लाइन के नीचे जोड़ दी:
GRUB_CMDLINE_LINUX_DEFAULT="text"

इसके बाद grub को इस कमांड से अपडेट कर दिया:
sudo update-grub

grub को अपडेट करने के बाद Ubuntu को रीस्टार्ट किया और जी हाँ, अब मैं कमांड लाइन पर ही था! यदि आपको कमांड लाइन से कभी थोड़ी देर के लिए GUI में जाना हो तो यह कमांड चलाइये:
sudo service lightdm start

Upgrading VirtualBox on Windows 7 Host with Ubuntu Guest

Long back I had brought home a zip file containing Ubuntu 12.04.3 virtual machine files and was able to run them by installing VirtualBox 4.2.x on my Windows 7 machine and double clicking the .vbox files after unzipping. Also, I had brought another similar archive containing Kali Linux.

Words and Meanings

Yesterday, one of our colleagues re-joined office after his marriage and we were congratulating him. While being congratulated, some bantering was also going on. During all this convivial mood, I heard some words which sounded very objectionable to me - because at that time, one of our female colleagues was in that room and I could not tolerate that such a joke be made in the presence of a lady.

दिल की बयानबाजी

जबसे मैंने अपने आपको जाना है,
मेरे पास कुछ अच्छा करने का इक अफसाना है
अच्छा करने को एक मंजिल बनाया, यही भूल की,
मंजिल की बजाये उसे रास्ता बनाऊंगा अब
जिंदगियां बदलने से पहले खुद बदलनी होगी अपनी जिंदगानी
बस इसी तर्ज़ पर चलेगी अब अपनी कहानी

ऐसा नहीं की मैं बहुत काबिल गृहस्थ हूँ,
बस जिम्मेदारी के बोझ से ग्रस्त हूँ,
पूरा जोर वहां लगा नहीं पाउँगा,
पर उस राह पर कुछ कदम ज़रूर बढाऊंगा
शायद वहां के राहगीरों को कुछ छाया दे पाऊं
या शायद कुछ पल को उनकी प्यास बुझा पाऊं

हालात सुधरने का इंतज़ार
हालात सुधारते हुए कर पाऊं
मंजिल की तलाश में कुछ
पगडंडियों को ही जिला जाऊं

Migration of Windows 7 to a new hard disk Part II - All is well that ends well

Am back again, only this time to share my newly found happiness. Yes, my Windows 7 is running from a new primary partition without any dependency on the legacy Windows XP in a large partition with plenty of room for elbow, leg and if you like stilts :)

Could help but persist from my last week's multiple failed attempts which had made me somewhat wiser. I sat back and tried to put what I had learnt in perspective.

Migration of Windows 7 to a new hard disk - Frustrations Galore

Am recording my attempts of migrating Windows 7 to a new hard disk.

This all started when my 3 year old heavily used Samsung drive started getting full and started showing some warning messages regarding the number of bad sectors. Earlier, I had set up my computer in a multi-boot configuration with Windows XP being the first OS followed by the following in the same order:
Windows 7;
Fedora 13
Ubuntu 12.04

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