My Experiments with Open Source - second innings with Linux (हिंदी)

मैं बहुत दिनों से Windows छोड़कर Linux पर आना चाहता था| मैंने करीब ढाई साल पहले dual boot mode में Ubuntu install भी किया और Ubuntu और Windows में डूबते-उतराते एक PHP project भी पूरा किया| लेकिन करीब चार महीने होते-होते मैं फिर लौटकर पूरी तरह Windows पर ही आ गया था| हाँ, Ubuntu को भी uninstall नहीं किया, बल्कि समय समय पर upgrade भी करता रहा - परन्तु काम के नाम पर केवल browsing और थोडा-बहुत open-office. इसकी वजह थी Windows के GUI की जबरदस्त आदत होने की वजह से Ubuntu पर खुद को असहज पाना | मेरे ख्याल से अभी भी Windows Explorer अपने extensions और right-click के साथ Linux interface से कहीं ज्यादा सुविधाजनक है और शायद ही निकट भविष्य में Linux इस मामले में Windows को पछाड़ पाए|

इसके बावजूद Linux को फिर से अपनाने की बहुत इच्छा थी क्योंकि:
मैं और मेरे साथी open source web-applications पर काम करते हैं और बहुत सारे open source tools और applications इस्तेमाल कर रहे हैं| जिन servers पर ये applications deploy होती हैं, वे ज्यादातर सभी Linux पर चलते हैं| Linux की आदत न होने से server पर बहुत सारी last-minute problems से deal करने में मुश्किल होती है| अपने computer पर Linux अपनाने और उसकी आदत होने से ऐसे problems से deal करना आसान हो जाता है|

एक और वजह यह है कि एक system administrator या software developer के नजरिये से देखा जाए तो Linux के command-line की power का जवाब नहीं है और बहुत सारे tools जैसे grep, sed इत्यादि command-line के इस्तेमाल को काफी आकर्षक बना देते हैं| मेरे ख्याल से किसी programmer को Linux पर आने से पहले command-line को अपनाने के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए क्योंकि command-line की power और quick response की आदत पड़ने के बाद आपकी Windows GUI की तलब खुद-ब-खुद मिट जाती है - परन्तु तब तक धैर्य रखना पड़ता है - ऐसा मेरे कुछ साथियों का अनुभव है|

इसके सिवाय भावनात्मक वजहें हैं - जिज्ञासा, challenge और open source की ओर philosophical रुझान|

खुद का अनुभव बताऊँ तो programming का शौक बहुत पहले से होने के बावजूद, as a programmer, Microsoft के closed-source माहौल में मेरी progress धीमी थी क्योंकि closed-source में आप केवल तैयार software product ही देख पाते हैं, न कि उसके source code को| दूसरे, ज्यादातर closed-source products मुफ्त नहीं होते और खरीदने के बाद भी आपको किसी product को अपनी इच्छानुसार इस्तेमाल करने और बदलने की आजादी नहीं होती|

closed-source software के विपरीत open source projects में महान software programmers का काम, पूरे source code समेत आपके सामने होता है - न केवल देख कर प्रेरित होने के लिए, बल्कि उसको modify करके अपने और अपने client के अनुरूप बनाने की आजादी, सीखने और कमाने का बेजोड़ मौका है| इनमें से अधिकतर full version के मुफ्त इस्तेमाल की आजादी देते हैं जिससे नए नए प्रयोग करने का अवसर मिलता है| मेरे ख्याल से सभी सीखने की जगहों पर open source compulsory होना चाहिए ताकि सीखने और कमाने के लिए नयी पीढ़ी इसका पूरा इस्तेमाल कर सके|

open source software को जानने के बाद मेरे सीखने की रफ़्तार तेजी से बढ़ी और मेरा शौक जल्द ही मेरा पेशा भी बन गया| ऐसा नहीं है कि Windows के लिए open source software उपलब्ध नहीं है| अभी तक तो मैं Windows पर भी बहुत सारे open source software इस्तेमाल करता हूँ जैसे OpenOffice.org, Xampp, FileZilla, Notepad++, VLC Media Player, WinMerge, 7-Zip, TortoiseSVN इत्यादि| साथ ही web-applications जैसे Moodle और Drupal. ये सभी अपने-अपने काम में लाजवाब हैं और Windows पर बखूबी काम करते हैं - परन्तु बहुत हसरत है कि open source कि गंगा यानी कि Linux में जी भर के गोते लगाऊं|

कई दिनों बाद मुझे पूरे दिन का समय एक साथ मिला है और मैंने अपनी हसरत को अंजाम दे दिया है| मैंने पहली बार Ubuntu 10.04 पर NetBeans PHP IDE install कर लिया है - पूरी शान से xdebug के साथ और testing में वह ठीक से debug भी कर रहा है| देखना है Linux अपनाने की अपनी इस कोशिश में इस बार मैं कितना कामयाब होता हूँ| मेरा पूरा विश्वास है की मेरी ये कोशिश जरूर सफल होगी और छ: महीने बाद मैं सबको ख़ुशी-ख़ुशी अपने जीवन के इस बड़े बदलाव के बारे में बता रहा हूँगा|

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