दिल की बयानबाजी

जबसे मैंने अपने आपको जाना है,
मेरे पास कुछ अच्छा करने का इक अफसाना है
अच्छा करने को एक मंजिल बनाया, यही भूल की,
मंजिल की बजाये उसे रास्ता बनाऊंगा अब
जिंदगियां बदलने से पहले खुद बदलनी होगी अपनी जिंदगानी
बस इसी तर्ज़ पर चलेगी अब अपनी कहानी

ऐसा नहीं की मैं बहुत काबिल गृहस्थ हूँ,
बस जिम्मेदारी के बोझ से ग्रस्त हूँ,
पूरा जोर वहां लगा नहीं पाउँगा,
पर उस राह पर कुछ कदम ज़रूर बढाऊंगा
शायद वहां के राहगीरों को कुछ छाया दे पाऊं
या शायद कुछ पल को उनकी प्यास बुझा पाऊं

हालात सुधरने का इंतज़ार
हालात सुधारते हुए कर पाऊं
मंजिल की तलाश में कुछ
पगडंडियों को ही जिला जाऊं

खुद को काबिल समझने का गुमान न करू
गर हालात को बदलने के लिए काबिलियत की दरकार न हो